मोरछड़ी लहराई रे बाबा तेरी मोरछड़ी

पूजा सखी
अन्य भजन भजन पूजा सखी
॥ दोहा ॥

मोरछड़ी का झाड़ा लागे, भागे सब संताप।
पूजा सखी के सिर धरियो, मिटे जन्म के पाप॥

॥ चौपाई ॥

मोरछड़ी लहराई रे, बाबा तेरी मोरछड़ी।
संकट सब मिट जावे रे, जब झूमे मोरछड़ी॥
मोरछड़ी लहराई रे॥

जादू सा कर देती है ये पावन मोरछड़ी।
दुखियों के आंसू पोंछे ये सुंदर मोरछड़ी॥
जिसके सिर पे फिर जावे, उसकी बिगड़ी बनी।
मोरछड़ी लहराई रे, बाबा तेरी मोरछड़ी॥

खाटू के दरबार में जब मोरछड़ी लहराए।
भक्तों के मन का संताप पल भर में मिट जाए॥
नीले के असवार की ये महिमा है घनी।
मोरछड़ी लहराई रे, बाबा तेरी मोरछड़ी॥

पूजा सखी कहे बाबा मोपे भी कर दो वार।
मोरछड़ी का झाड़ा देके, कर दो बेड़ा पार॥
श्याम धणी की जय बोले, भक्तों की ये लड़ी।
मोरछड़ी लहराई रे, बाबा तेरी मोरछड़ी॥

॥ दोहा ॥

मोरछड़ी कल्याणमयी, संकट हरणी जान।
पूजा सखी शरण पड़ी, राखहु मेरो मान॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

बाबा श्याम की चमत्कारी मोरछड़ी के स्पर्श और झाड़े से भक्तों के सभी संकटों के निवारण का उल्लासमय संकीर्तन।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।