मोरपंख की छड़ी सोहे, सांवरिया के हाथ।
झाड़ा लगते ही मिटे, संकट पलक निपात॥
मोरछड़ी का चमत्कार, जिसने देखा वो हैरान हुआ।
खाटू वाले बाबा का, उसपे बड़ा अहसान हुआ॥
मोरछड़ी का चमत्कार॥
रोग शोक सब दूर हटाए, मोरछड़ी जब लहराए।
दुखिया के जीवन में खुशियों, की बहार लौट के आए॥
अंधा देखे लंगड़ा डोले, निर्धन पर धनवान हुआ।
मोरछड़ी का चमत्कार॥
शीश के दानी बाबा श्याम, कलयुग का भगवान है।
इस चौखट की धूलि में, मिलता अमर सम्मान है॥
हारे का ये बना सहारा, जन जन का कल्यान हुआ।
मोरछड़ी का चमत्कार॥
कन्हैया मित्तल शीश झुकाए, खाटू के सांवरिया पे।
सदा बनी रहे कृपा तेरी, इस सेवक की नैया पे॥
मोरछड़ी का चमत्कार, जिसने देखा वो हैरान हुआ॥
मोरछड़ी की जय कहो, जय जय खाटू धाम।
कन्हैया मित्तल को मिले, श्री चरणों का विश्राम॥