मोला संग देबे माता

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Durga Puja Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

मोला संग देबे माता

कौरु नगर बर हो...

मोला संग देबे माता कौरु नगर बर हो २

जब पाटनपुर के पाट देवता, संबलपुर समलाई

गढ़ धमतरी के बिलाई ला सुमिरव, डोंगरगढ़ बमलाई रतनपुरी महामाई ला सुमिरव, धमधा के अटल कुंवारी

ऐ कौरु नगर बर हो... मोला संग देबे माता

राजिम मा हे राजीव लोचन, जीहां त्रिवेणी धाम हे ।

भोरमदेव मा भोला बिराजे, जग मा जेकर नाम हे ल

चंपारण मा सउहत बैठे, जग के पालनहारी ।

तोला बंदव तोला बंदव, छत्तीसगढ़ महतारी ।

ऐ कौरु नगर बर हो... मोला संग देबे माता

संतो की वाणी लिरिक्स

रईपुर के बंजारी ल नेवतेंव ,नेवतेंव माँ महामाई ।

कोरबा के मड़वारानी, झलमला के गंगा माई ।

पातालभैरवी नंदगाव के,अउ शीतला महामाई ।

आरा अउ पारा ल नेवतेंव, रइगढ़ बूढ़ी माई ।

ये नेवतेंव दुरग के चंडी ल,महासमुंद के खल्लारी ल

जाये बर लागे घर वो... मोला संग देबे माता

ये कट कट करके नाचे काली, धक धक धरनि डोले

झूपथे झुपाके परेतिन कउनो ल नई खौड़े

ये बैरी के ज़ब पाप बड़े मया ल वो बगरावे

देखव देख चंदवा बैगा ह मंतर ल भटकारे

ये जादू डगर बर हो... मोला संग देबे माता

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।