मोहन से दिल क्यूं लगाया है ये मैं जानूं या वो जाने

साध्वी पूर्णिमा जी (पूनम दीदी)
श्री कृष्ण भजन भजन साध्वी पूर्णिमा
॥ दोहा ॥

नेह लगायो सांवरे, कुल की कानि बहाय।
जो जाने सो प्रेम रस, जग क्या जाने हाय॥

॥ चौपाई ॥

मोहन से दिल क्यूं लगाया है, ये मैं जानूं या वो जाने।
छलिया पे दिल क्यूं आया है, ये मैं जानूं या वो जाने॥

हर बात निराली है उसकी, हर बात में उसका प्यार भरा।
लुट गई मैं उस सांवरे पे, तन मन सब वार दिया सारा॥

दुनिया वाले तो कहते हैं, दीवाना मुझको कहते हैं।
इस पागल दिल को क्या समझाएं, जो श्याम नाम ही रटते हैं॥

मोहन से दिल क्यूं लगाया है, ये मैं जानूं या वो जाने॥

॥ दोहा ॥

प्रेम दीवानी हो गई, सुध बुध रही न काय।
साध्वी पूर्णिमा कहत है, मोहन शरण समाए॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

श्री कृष्ण के दिव्य प्रेम में दीवानी आत्मा का यह उद्गार बताता है कि ईश्वर से प्रेम का गूढ़ रहस्य केवल प्रेमी और परमात्मा ही समझ सकते हैं।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।