म्हारी पत राखो गोपाल, एक बस थारो सहारो है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

म्हारी पत राखो गोपाल,

एक बस थारो सहारो है,

थोड़ी करल्यो थे म्हारी संभाल,

थोड़ी करल्यो थे म्हारी संभाल,

एक बस थारो सहारो है,

म्हारी पत राखों गोपाल,

एक बस थारो सहारो है ॥

म्हाने मिल्या थे थारी दया है,

टाबरिया भोला म्हे थारा,

थे ही सखा हो मायड़ हो थे ही,

थे ही पिता हो म्हारा,

थारे बिन तो रहवा बेहाल,

थारे बिन तो रहवा बेहाल,

एक बस थारो सहारो है,

म्हारी पत राखों गोपाल,

एक बस थारो सहारो है ॥

क्यों ना तू रुझे क्यों ना पसीजे,

बोल कठेसी मैं जावां,

थारे चरण में थारी शरण में,

बाबा मैं आराम पावा,

छोड़ आया मैं जी को जंजाल,

छोड़ आया मैं जी को जंजाल,

एक बस थारो सहारो है,

म्हारी पत राखों गोपाल,

एक बस थारो सहारो है ॥

‘चोखानी’ थारो बालक है बाबा,

गलती की माफ़ी है चावे,

हो जा तू राजी ओ रे मिजाजी,

कुण म्हारी विपदा मिटावे,

म्हापे मुस्का के मत ना तू टाल,

म्हापे मुस्का के मत ना तू टाल,

एक बस थारो सहारो है,

म्हारी पत राखों गोपाल,

एक बस थारो सहारो है ॥

म्हारी पत राखो गोपाल,

एक बस थारो सहारो है,

थोड़ी करल्यो थे म्हारी संभाल,

थोड़ी करल्यो थे म्हारी संभाल,

एक बस थारो सहारो है,

म्हारी पत राखों गोपाल,

॥ दोहा ॥

एक बस थारो सहारो है ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।