म्हारी दादी जगत सेठाणी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Maa Durga Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

म्हारी दादी जगत सेठाणी,

म्हारो मौज करे परिवार,

म्हारी दादी जी,

मांग लेवा दादी से जद भी,

मांग लेवा दादी से जद भी,

पड़े कोई दरकार,

म्हारी दादी जी,

म्हारी दादी जगत सेठानी,

म्हारो मौज करे परिवार,

म्हारी दादी जी ॥

पूत कपूत जिसा भी हाँ,

आखिर दादी का टाबर हाँ,

किस्मत में लिखवा कर ल्याया,

किस्मत में लिखवा कर ल्याया,

मांगण को अधिकार,

म्हारी दादी जी,

म्हारी दादी जगत सेठानी,

म्हारो मौज करे परिवार,

म्हारी दादी जी ॥

क्यों ना म्हे इतरावा,

म्हारी दादी जगत सेठाणी है,

जिके द्वार पे मांगण ता ई,

जिके द्वार पे मांगण ता ई,

आवे यो संसार,

म्हारी दादी जी,

म्हारी दादी जगत सेठानी,

म्हारो मौज करे परिवार,

म्हारी दादी जी ॥

जद से पडोसी जाण गया,

म्हारो जोर चले है दादी पे,

रोज कवे म्हाने भी मिला दे,

रोज कवे म्हाने भी मिला दे,

दादी से इक बार,

म्हारी दादी जी,

म्हारी दादी जगत सेठानी,

म्हारो मौज करे परिवार,

म्हारी दादी जी ॥

‘सोनू’ कवे या दादी ना तो,

तेरी है ना मेरी है,

जग जननी है या तो सारे,

जग जननी है या तो सारे,

जग की पालनहार,

म्हारी दादी जी,

म्हारी दादी जगत सेठानी,

म्हारो मौज करे परिवार,

म्हारी दादी जी ॥

म्हारी दादी जगत सेठाणी,

म्हारो मौज करे परिवार,

म्हारी दादी जी,

मांग लेवा दादी से जद भी,

मांग लेवा दादी से जद भी,

पड़े कोई दरकार,

म्हारी दादी जी,

म्हारी दादी जगत सेठानी,

म्हारो मौज करे परिवार,

म्हारी दादी जी ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।