म्हारे मनड़े री डोर, दादी खींचो थारी ओर

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Navratri Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

म्हारे मनड़े री डोर,

दादी खींचो थारी ओर,

थासु विनती करा हां,

दादी दोनों हाथा जोड़,

म्हारे सिर पर हाथ फिराओ,

म्हणे हिवड़े से लगाओ,

म्हारी मावड़ी,

म्हारें मनडे री डोर,

दादी खींचो थारी ओर ॥

जद से देख्यो थारो द्वारो,

भूल गयो हूँ जग मैं सारो,

कई जन्मा से है लेखो जोखो,

दादी थारो म्हारो,

म्हारे सिर पर हाथ फिराओ,

म्हणे हिवड़े से लगाओ,

म्हारी मावड़ी,

म्हारें मनडे री डोर,

दादी खींचो थारी ओर ॥

म्हाने भूल बिसर मति जाजो,

म्हारी विनती सुनके आजो,

मैं भी टाबरिया हाँ थारा दादी,

म्हासु भी बतलाजो,

म्हारे सिर पर हाथ फिराओ,

म्हणे हिवड़े से लगाओ,

म्हारी मावड़ी,

म्हारें मनडे री डोर,

दादी खींचो थारी ओर ॥

थे हो सारे जग की ठाकर,

म्हे हां थारे चरण का चाकर,

सारी दुनिया भूल गया हां,

दादी थाने म्हे तो पाकर,

म्हारे सिर पर हाथ फिराओ,

म्हणे हिवड़े से लगाओ,

म्हारी मावड़ी,

म्हारें मनडे री डोर,

दादी खींचो थारी ओर ॥

थारो सेवकियो है ‘श्याम’,

लेवे हर पल तेरो नाम,

थारे चरणा माहि दादी म्हारा,

सारा तीरथ धाम,

म्हारे सिर पर हाथ फिराओ,

म्हणे हिवड़े से लगाओ,

म्हारी मावड़ी,

म्हारें मनडे री डोर,

दादी खींचो थारी ओर ॥

म्हारे मनड़े री डोर,

दादी खींचो थारी ओर,

थासु विनती करा हां,

दादी दोनों हाथा जोड़,

म्हारे सिर पर हाथ फिराओ,

म्हणे हिवड़े से लगाओ,

म्हारी मावड़ी,

म्हारे मनडे री डोर,

दादी खींचो थारी ओर ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।