म्हारा कुञ्ज बिहारी कृष्ण मुरारी बरसाने बागा में बोले मोर

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

म्हारा कुञ्ज बिहारी,

कृष्ण मुरारी,

बरसाने बागा में बोले मोर ॥

डूंगर ऊपर डूंगरी रे,

जा पर बैठ्या मोर,

मोर चुगावण मैं गई जी,

मोर चुगावण मैं गई जी,

मिल गया नंदकिशोर जी,

म्हारा कुँज बिहारी,

कृष्ण मुरारी,

बरसाने बागा में बोले मोर ॥

सावन बरस भादवो बरस्यो,

माच रह्यो घनघोर,

दादुर मोर पपीहा बोले,

दादुर मोर पपीहा बोले,

कोयल कर रही शोर जी,

म्हारा कुँज बिहारी,

कृष्ण मुरारी,

बरसाने बागा में बोले मोर ॥

पिया पिया थाने केवस्यू जी,

पिया थे ही चितचोर,

नटवर नागर सोवणा थे,

नटवर नागर सोवणा थे,

चंदा मैं हूँ चकोर जी,

म्हारा कुँज बिहारी,

कृष्ण मुरारी,

बरसाने बागा में बोले मोर ॥

चन्द्रसखी की विनती जी,

खींचो मन की डोर,

जब जब थाने याद करूँ जी,

जब जब थाने याद करूँ जी,

हिवड़े उठे हिलोर जी,

म्हारा कुँज बिहारी,

कृष्ण मुरारी,

बरसाने बागा में बोले मोर ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।