म्हापे जद भी मुसीबत, कोई आवन लागे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Navratri Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

म्हापे जद भी मुसीबत,

कोई आवन लागे,

कोई आवन लागे,

म्हारे सिर के ऊपर,

चुनड़ी लेहरावन लागे ॥

जद नैया हिचकोले खावे,

माँ थारी चुनड़ लहरावे,

अपने आप ही भवर में,

नैया चालन लागे,

नैया चालन लागे,

म्हारे सिर के ऊपर,

चुनड़ी लेहरावन लागे ॥

लाज भगत की जावन लागे,

चुनड़ी मैया की लहरावण लागे,

थारी चुनड़ी माँ लाज ने,

बचावण लागे,

माँ बचावण लागे,

म्हारे सिर के ऊपर,

चुनड़ी लेहरावन लागे ॥

जद जद म्हारो मन घबरावे,

माँ थारी चुनड़ लहरावे,

हाथों हाथ ही यो बेटो,

मुस्कावन लागे,

मुस्कावन लागे,

म्हारे सिर के ऊपर,

चुनड़ी लेहरावन लागे ॥

जद जद मैया म्हासु रूठे,

‘बनवारी’ कुछ और ना सूझे,

थारा बेटा थाने चुनरी,

उड़ावन लागे,

उड़ावन लागे,

म्हारे सिर के ऊपर,

चुनड़ी लेहरावन लागे ॥

म्हापे जद भी मुसीबत,

कोई आवन लागे,

कोई आवन लागे,

म्हारे सिर के ऊपर,

चुनड़ी लेहरावन लागे ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।