भजन: मेरो लाला झूले पालना, नित होले झोटा दीजो !

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

मेरो लाला झूले पालना, नित होले झोटा दीजो

नित होले झोटा दीजो, नित होले झोटा दीजो

मेरो लाला झूले पालना, नित होले झोटा दीजो

नित होले झोटा दीजो, नित होले झोटा दीजो

मथुरा में जाको जनम लियो है, मतुरा में जाको जनम लियो है

गोकुल में झुले पालना, नित होले झोटा दीजो॥ मेरो लाला झूले पालना ॥

काहे को जाको बनो है पालनो, काहे को जाको बनो है पालनो

काहे के लागे फूलना, नित होले झोटा दीजो॥ मेरो लाला झूले पालना ॥

रत्न जड़ित जाको बनो है पालनौ, रत्न जड़ित जाको बनो है पालनौ

रेशम के लागे फूलना, नित होले झोटा दीजो॥ मेरो लाला झूले पालना ॥

चन्द्र सखी भज बाल कृष्ण छवि, चन्द्र सखी भेज बाल कृष्ण छवि

चीरजीवो ये लालना, नित होले झोटा दीजो॥ मेरो लाला झूले पालना ॥

मेरो लाला झूले पालना, नित होले झोटा दीजो

नित होले झोटा दीजो, नित होले झोटा दीजो

Read Also

» दिल्ली मे कहाँ मनाएँ श्री कृष्ण जन्माष्टमी। | भोग प्रसाद

» श्री कृष्ण जन्माष्टमी - Shri Krishna Janmashtami

» दिल्ली और आस-पास के प्रसिद्ध श्री कृष्ण मंदिर। | जानें दिल्ली मे ISKCON मंदिर कहाँ-कहाँ हैं? | दिल्ली के प्रमुख श्री कृष्ण प्रणामी मंदिर।

» ब्रजभूमि के प्रसिद्ध मंदिर! | भारत के चार धाम

» आरती: श्री बाल कृष्ण जी | भोग आरती: श्रीकृष्ण जी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।