मेरी ज़िन्दगी सवर जाए

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Vishnu Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

मेरी ज़िन्दगी सवर जाए,

अगर तुम मिलने आ जाओ,

तमन्ना फिर मचल जाये,

अगर तुम मिलने आ जाओ ॥

और जो कुछ है तोर,

तेरा तुझको सौंपता,

गुरुवर क्या लागे है मोर।

नब्जें जवाब दे चुकी,

सांस का कुछ पता नहीं,

आज का दिन तो कट गया,

कल की मुझे खबर नहीं।

तेरी कृपा से बेनियाज़,

कौन सी शय मिली नहीं,

झोली ही मेरी तंग है,

तेरे यहाँ कमी नहीं ॥

सर भी है पेशे नजर,

इसके आगे तो बता दे,

क्या है नजराना तेरा ॥

छलकते आँख के आंसू,

कही बेकार ना हो जाए,

कही बेकार ना हो जाए,

चरण छूकर बने मोती,

अगर तुम मिलने आ जाओ,

मेरी ज़िन्दगी संवर जाए,

अगर तुम मिलने आ जाओ ॥

करम से बन गया पत्थर,

नहीं है रूप मेरा कोई,

नहीं है रूप मेरा कोई,

सलीके से संवर जाऊँ,

अगर तुम मिलने आ जाओ,

मेरी ज़िन्दगी संवर जाए,

अगर तुम मिलने आ जाओ ॥

बिना तेरे ओ मनमोहन,

मैं मुरझा सा ही रहता हूँ,

मैं मुरझा सा ही रहता हूँ,

चमन मन के ये खिल जाए,

अगर तुम मिलने आ जाओ,

मेरी ज़िन्दगी संवर जाए,

अगर तुम मिलने आ जाओ ॥

नही मिलते हो तुम मुझसे,

तो मोह दुनिया से होता है,

तो मोह दुनिया से होता है,

कटे सारे ये भव बंधन,

अगर तुम मिलने आ जाओ,

मेरी ज़िन्दगी संवर जाए,

अगर तुम मिलने आ जाओ ॥

भटकता रहता हूँ दर दर,

तेरे दीदार के खातिर,

तेरे दीदार के खातिर,

भटकना छुट जाए,

अगर तुम मिलने आ जाओ,

मेरी ज़िन्दगी संवर जाए,

अगर तुम मिलने आ जाओ ॥

मेरी ज़िन्दगी सवर जाए,

अगर तुम मिलने आ जाओ,

तमन्ना फिर मचल जाये,

॥ दोहा ॥

अगर तुम मिलने आ जाओ ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।