॥ दोहा ॥
राधे तू बड़भागिनी, कौन तपस्या कीन।
तीन लोक तरण तरन, सो तेरे आधीन॥
॥ चौपाई ॥
मेरी विनती यही है राधा रानी, कृपा बरसाए रखना।
मुझे अपने ही चरणों में, श्यामा बिठाए रखना॥
छूटे ना कभी तेरा ये द्वार, यही है मेरी पुकार।
तेरे चरणों में रहे मेरा ध्यान, यही वरदान देना बारंबार॥
भूल चूक मेरी बिसरा देना, अपनी दासी जान के।
भवसागर से पार लगा देना, राधा नाम मान के॥
मेरी विनती यही है राधा रानी, कृपा बरसाए रखना॥
॥ दोहा ॥
श्री वृषभानु दुलारी की जय, जय जय बरसाने वाली।
दीन हीन दासी पे सदा, रहियो कृपा निहाली॥