मेरी मैया तुम्हे अर्पण, भला हम क्या करें

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Durga Bhajan Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

मेरी मैया तुम्हे अर्पण,

भला हम क्या करें,

तुम्हीं से है मेरी दुनिया भला,

दम क्या भरें,

मेरी मैया तुम्हें अर्पण,

भला हम क्या करें ॥

न्योछावर कर दूं ये दौलत,

मगर वो दी तुम्हारी है,

लुटा दूं जान अपनी भी,

मगर वो भी तुम्हारी‌ है,

जमाने में जिधर देखूं,

उधर तू ही नज़र आए,

तुम्ही बतलाओ ऐ दाती,

कि अब हम क्या करें,

तुम्हीं से है मेरी दुनिया भला,

दम क्या भरें,

मेरी मैया तुम्हें अर्पण,

भला हम क्या करें ॥

चढ़ाऊं फूल तुमको तो,

ये गुलशन भी तुम्हारा है,

खिलाऊं मैवा मिश्री तो,

सकल जग ही तुम्हारा है,

जमीं आकाश शसितारे,

सभी में वास तुम्हारा है,

समझ कुछ भी नहीं आता,

कि अब क्या करें,

तुम्हीं से है मेरी दुनिया भला,

दम क्या भरें,

मेरी मैया तुम्हें अर्पण,

भला हम क्या करें ॥

करूं मैं सेवा चरणों की,

यही उम्मीद लाया हूं,

बुझा दो प्यास नैनों की,

तेरे दरबार आया हूं,

भरो झोली मेरी भी माँ,

यही फरियाद लाया हूं,

‘विजय शिव’ की क्षमा करदो खता,

और क्या कहें,

तुम्हीं से है मेरी दुनिया भला,

दम क्या भरें,

मेरी मैया तुम्हें अर्पण,

भला हम क्या करें ॥

मेरी मैया तुम्हे अर्पण,

भला हम क्या करें,

तुम्हीं से है मेरी दुनिया भला,

दम क्या भरें,

मेरी मैया तुम्हें अर्पण,

भला हम क्या करें ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।