मेरी लगती न हरि बिन अंखियां

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Baal Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

मेरी लगती न हरि बिन अंखियां,

हे मेरी लगती न हरि बिन अंखियां।

अंखियां, हे री सखी अंखियां,

हे मेरी लगती न हरि बिन अंखियां।

मैं भी रंगाई संग हरि भी रंगाया,

मैं भी रंगाई संग हरि भी रंगाया।

और रंगाई सारी सखियां,

सखी री लगती न हरि बिन अंखियां।

हे मेरी लगती न हरि बिन अंखियां।

मैं भी जगाई संग हरि भी जगाया,

मैं भी जगाई संग हरि भी जगाया।

और जगाई सारी सखियां,

सखी री लगती न हरि बिन अंखियां।

हे मेरी लगती न हरि बिन अंखियां।

ज्ञान का दीपक मेरे श्याम जलाया,

श्याम ने जलाया, मेरे श्याम ने जलाया।

घोर अंधेरा काटणिया,

मेरी लगती न हरि बिन अंखियां।

हे मेरी लगती न हरि बिन अंखियां।

अंखियां, हे री सखी अंखियां,

हे मेरी लगती न हरि बिन अंखियां।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।