॥ दोहा ॥
श्याम नाम की लगन लगी, छूट गए सब जाल।
जिसके मन में गिरधर बसे, सोई भयो निहाल॥
॥ चौपाई ॥
मेरी लगी श्याम संग प्रीत, ये दुनिया क्या जाने।
क्या जाने कोई क्या जाने, ये दुनिया क्या जाने॥
मेरी लगी श्याम संग प्रीत, ये दुनिया क्या जाने॥
छोड़ दिया जग का झमेला, श्याम नाम रंग राची।
दुनिया के सब वादे झूठे, श्याम प्रीत ही साची॥
मेरे रोम रोम में गूँजे, मुरली की मीठी तान।
मेरी लगी श्याम संग प्रीत, ये दुनिया क्या जाने॥
कन्हैया मित्तल गाए भजनिया, मस्त मलंग होकर।
श्याम कृपा की छाँव मिली है, जग की चिंता खोकर॥
॥ दोहा ॥
गोविंद मेरो है, गोपाल मेरो है।
कन्हैया मित्तल भज रे, श्री बांके बिहारी मेरो है॥