मेरी लगी श्याम संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने

साध्वी पूर्णिमा जी (पूनम दीदी)
श्री कृष्ण भजन भजन साध्वी पूर्णिमा
॥ दोहा ॥

श्याम रंग में रंग गई चुनरी, अंग अंग उल्लास।
तात मात सब छोड़िया, एक गिरधर की आस॥

॥ चौपाई ॥

मेरी लगी श्याम संग प्रीत, ये दुनिया क्या जाने।
क्या जाने कोई क्या जाने, ये दुनिया क्या जाने॥

छोड़ दिया मैंने जग का नाता, श्याम से नाता जोड़ लिया।
प्रेम की डोरी सांवरिया से, मन का पंछी छोड़ दिया॥

लोक लाज कुल की मर्यादा, सब कुछ मैंने बिसराया।
मेरी लगी श्याम संग प्रीत, ये दुनिया क्या जाने॥

॥ दोहा ॥

मीरा के प्रभु गिरधर नागर, साध्वी गावत गान।
श्याम शरण में जो रहे, सो पावे कल्यान॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

संसार की परवाह किए बिना भगवान श्री कृष्ण के साथ अनन्य प्रीति जोड़ने का प्रसिद्ध मीरा भाव से ओतप्रोत भजन।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।