॥ दोहा ॥
श्याम रंग में रंग गई चुनरी, अंग अंग उल्लास।
तात मात सब छोड़िया, एक गिरधर की आस॥
॥ चौपाई ॥
मेरी लगी श्याम संग प्रीत, ये दुनिया क्या जाने।
क्या जाने कोई क्या जाने, ये दुनिया क्या जाने॥
छोड़ दिया मैंने जग का नाता, श्याम से नाता जोड़ लिया।
प्रेम की डोरी सांवरिया से, मन का पंछी छोड़ दिया॥
लोक लाज कुल की मर्यादा, सब कुछ मैंने बिसराया।
मेरी लगी श्याम संग प्रीत, ये दुनिया क्या जाने॥
॥ दोहा ॥
मीरा के प्रभु गिरधर नागर, साध्वी गावत गान।
श्याम शरण में जो रहे, सो पावे कल्यान॥