मेरी लगी श्याम संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने

चित्र विचित्र जी महाराज
श्री कृष्ण भजन भजन चित्र विचित्र जी
॥ दोहा ॥

सांचे प्रीत श्याम संग लागी, छूटी जग की आस।
चित्र विचित्र मन भयो मगन, वृंदावन के वास॥

॥ चौपाई ॥

मेरी लगी श्याम संग प्रीत, ये दुनिया क्या जाने।
क्या जाने कोई क्या जाने, ये दुनिया क्या जाने॥
मेरी लगी श्याम संग प्रीत, ये दुनिया क्या जाने॥

मुझे मिल गया मन का मीत, ये दुनिया क्या जाने।
सांवरिया की बंशी बाजे, सुधबुध खोई सारी॥
छूटी लोक लाज कुल की रीत, ये दुनिया क्या जाने।
मेरी लगी श्याम संग प्रीत, ये दुनिया क्या जाने॥

महलों की अब चाह नहीं है, कुटिया प्यारी लागे।
श्याम कृपा से मेरे सोया, भाग्य सुहाना जागे॥
गाऊं प्रेम मिलन के गीत, ये दुनिया क्या जाने।
मेरी लगी श्याम संग प्रीत, ये दुनिया क्या जाने॥

चित्र विचित्र कहे मनमोहन, तू ही मेरा सहारा।
तुझ पर वार दिया मैंने तो, जीवन अपना सारा॥
सच्ची भक्ति की ये जीत, ये दुनिया क्या जाने।
मेरी लगी श्याम संग प्रीत, ये दुनिया क्या जाने॥

॥ दोहा ॥

श्याम रंग में रंग गया, मेरो चंचल मन।
चित्र विचित्र अर्पण कियो, तन मन और जीवन॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

संसार की परवाह किए बिना केवल श्यामसुंदर के चरणों में अनन्य प्रीति जोड़ने की मधुर अभिव्यक्ति।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।