मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे राम आएंगे

कन्हैया मित्तल
श्री राम भजन भजन कन्हैया मित्तल
॥ दोहा ॥

शबरी बैठी बाट जोहे, कबहूँ आवेंगे राम।
दीनबंधु दयाल प्रभु, पूरण कीजे काम॥

॥ चौपाई ॥

मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे, राम आएंगे।
राम आएंगे आएंगे राम आएंगे॥
मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे, राम आएंगे॥

राम आएंगे तो अंगना सजाऊंगी।
दीप जला के दिवाली मैं मनाऊंगी॥
मेरे जन्मों के सारे पाप धुल जाएंगे, राम आएंगे।
मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे, राम आएंगे॥

राम झूलेंगे तो पालना झुलाऊंगी।
मीठे मीठे मैं भजन सुनाऊंगी॥
तन मन धन सब उनपे लुटाऊंगी, राम आएंगे।
मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे, राम आएंगे॥

कन्हैया मित्तल गाए प्रेम के तराने।
आ गए मेरे प्रभु दुनिया को तारने॥
चरणों की धूलि से हम तर जाएंगे, राम आएंगे।
मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे, राम आएंगे॥

॥ दोहा ॥

कौशल्या नंदन प्रभु, सीता पति रघुनाथ।
कन्हैया मित्तल शीश धरे, राखो सिर पर हाथ॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

भक्त शबरी के निश्चल प्रेम और समर्पण की स्मृति में गाया गया यह भावपूर्ण भजन प्रभु श्री राम के शुभागमन की असीम प्रतीक्षा और उल्लास का प्रतीक है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।