मेरी अखियन आगे रहियो री प्यारी राधे

इंद्रेश जी महाराज
श्री कृष्ण भजन भजन इंद्रेश जी महाराज
॥ दोहा ॥

नैनन में राधा बसी, पलकन में विश्राम।
इंद्रेश हिय में वास करे, युगल रूप सुखधाम॥

॥ चौपाई ॥

मेरी अखियन आगे रहियो री प्यारी राधे।
निसदिन दर्श दिखइयो री प्यारी राधे॥
मेरी अखियन आगे रहियो री प्यारी राधे॥

पलक झपकते ही मन घबराए।
तेरी छवि बिन चैन न पाए॥
अपने रूप की छांव में रखियो री प्यारी राधे।
मेरी अखियन आगे रहियो री प्यारी राधे॥

बरसाने की ओ महारानी।
कान्हा जिनकी भरते पानी॥
मुझ दीन पे दया बरसइयो री प्यारी राधे।
मेरी अखियन आगे रहियो री प्यारी राधे॥

इंद्रेश पुकारे लाडली सुन लो।
चरणन की दासी मुझे चुन लो॥
जीवन धन्य बनइयो री प्यारी राधे।
मेरी अखियन आगे रहियो री प्यारी राधे॥

॥ दोहा ॥

श्री राधा नयनों बसे, दूर भयो अंधकार।
इंद्रेश प्रभु के संग रमे, जय जय सुख भंडार॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

भक्त की श्री राधा रानी से निरंतर अपने नेत्रों के समक्ष विराजने और कभी ओझल न होने की आर्त प्रार्थना।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।