॥ दोहा ॥
नैनन में राधा बसी, पलकन में विश्राम।
इंद्रेश हिय में वास करे, युगल रूप सुखधाम॥
॥ चौपाई ॥
मेरी अखियन आगे रहियो री प्यारी राधे।
निसदिन दर्श दिखइयो री प्यारी राधे॥
मेरी अखियन आगे रहियो री प्यारी राधे॥
पलक झपकते ही मन घबराए।
तेरी छवि बिन चैन न पाए॥
अपने रूप की छांव में रखियो री प्यारी राधे।
मेरी अखियन आगे रहियो री प्यारी राधे॥
बरसाने की ओ महारानी।
कान्हा जिनकी भरते पानी॥
मुझ दीन पे दया बरसइयो री प्यारी राधे।
मेरी अखियन आगे रहियो री प्यारी राधे॥
इंद्रेश पुकारे लाडली सुन लो।
चरणन की दासी मुझे चुन लो॥
जीवन धन्य बनइयो री प्यारी राधे।
मेरी अखियन आगे रहियो री प्यारी राधे॥
॥ दोहा ॥
श्री राधा नयनों बसे, दूर भयो अंधकार।
इंद्रेश प्रभु के संग रमे, जय जय सुख भंडार॥