मेरे उठे विरह में पीर

संत सूरदास
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

श्लोक

सब द्वारन को छोड़ के,

श्यामा आई तेरे द्वार,

श्री वृषभान की लाड़ली,

मेरी और निहार ॥

मेरे उठे विरह में पीर,

सखी वृन्दावन जाउंगी,

मुरली बाजे यमुना तीर,

सखी वृन्दावन जाउंगी ॥

श्याम सलोनी सूरत पे,

दीवानी हो गई,

अब कैसे धारू धीर सखी,

सखी वृन्दावन जाउंगी ॥

छोड़ दिया मेने भोजन पानी,

श्याम की याद में,

मेरे नैनन बरसे नीर,

सखी वृन्दावन जाउंगी ॥

इस दुनिया के रिश्ते नाते,

सब ही तोड़ दिए,

तुझे कैसे दिखाऊं दिल चिर,

सखी वृन्दावन जाउंगी ॥

नैन लड़े मेरे गिरधारी से,

बावरी हो गई,

दुनिया से हो गई अंजानी,

सखी वृन्दावन जाउंगी ॥

मेरे उठे विरह में पीर,

सखी वृन्दावन जाउंगी,

मुरली बाजे यमुना तीर,

॥ दोहा ॥

सखी वृन्दावन जाउंगी ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।