॥ दोहा ॥
अवध पुरी अति रुचिर बनाई, देवन्ह सुमन वृष्टि झरि लाई।
राम लला सिंहासन बैठे, त्रिभुवन आनंद छाई॥
॥ चौपाई ॥
मेरे राम लला सरकार, अयोध्या में विराजे हैं।
सोने के सिंहासन पर, रघुनंदन साजे हैं॥
मेरे राम लला सरकार, अयोध्या में विराजे हैं॥
सरयू तट पर मंगल गावें, संत मुनि जय जयकार।
कोटि काम छबि नैन लुभावै, बालक रूप अपार॥
धन्य भाग सरयू की धारा, धन्य अवध की माटी।
मेरे राम लला सरकार, अयोध्या में विराजे हैं॥
कन्हैया मित्तल शीश झुकाकर, गावे अवध महिमाई।
सदा सुखी रहे वो नर नारी, जेहि मन बसे रघुराई॥
॥ दोहा ॥
राम नाम जग दीप धर, जीह देहरी द्वार।
कन्हैया मित्तल राम जप, होय परम निस्तार॥