मेरे राम लला सरकार अयोध्या में विराजे हैं

कन्हैया मित्तल
श्री राम भजन भजन कन्हैया मित्तल
॥ दोहा ॥

अवध पुरी अति रुचिर बनाई, देवन्ह सुमन वृष्टि झरि लाई।
राम लला सिंहासन बैठे, त्रिभुवन आनंद छाई॥

॥ चौपाई ॥

मेरे राम लला सरकार, अयोध्या में विराजे हैं।
सोने के सिंहासन पर, रघुनंदन साजे हैं॥
मेरे राम लला सरकार, अयोध्या में विराजे हैं॥

सरयू तट पर मंगल गावें, संत मुनि जय जयकार।
कोटि काम छबि नैन लुभावै, बालक रूप अपार॥
धन्य भाग सरयू की धारा, धन्य अवध की माटी।
मेरे राम लला सरकार, अयोध्या में विराजे हैं॥

कन्हैया मित्तल शीश झुकाकर, गावे अवध महिमाई।
सदा सुखी रहे वो नर नारी, जेहि मन बसे रघुराई॥

॥ दोहा ॥

राम नाम जग दीप धर, जीह देहरी द्वार।
कन्हैया मित्तल राम जप, होय परम निस्तार॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

अयोध्या धाम में प्रभु श्री राम लला के नूतन एवं भव्य मंदिर में सिंहासनारूढ़ होने पर भक्त समाज के आनंद और कृतज्ञता का गुणगान।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।