प्रभु जी तुम संगति सरन तिहारी

संत रविदास
श्री राम भजन Bhajan Guru Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

प्रभु जी तुम संगति सरन तिहारी।

जग-जीवन राम मुरारी॥

गली-गली को जल बहि आयो,

सुरसरि जाय समायो।

संगति के परताप महातम,

नाम गंगोदक पायो॥

॥ प्रभु जी तुम संगति...॥

स्वाति बूँद बरसे फनि ऊपर,

सोई विष होइ जाई।

ओही बूँद कै मोती निपजै,

संगति की अधिकाई॥

॥ प्रभु जी तुम संगति...॥

तुम चंदन हम रेंड बापुरे,

निकट तुम्हारे आसा।

संगति के परताप महातम,

आवै बास सुबासा॥

॥ प्रभु जी तुम संगति...॥

जाति भी ओछी, करम भी ओछा,

ओछा कसब हमारा।

नीचे से प्रभु ऊँच कियो है,

कहि 'रैदास चमारा॥

प्रभु जी तुम संगति सरन तिहारी।

॥ दोहा ॥

जग-जीवन राम मुरारी॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।