मेरे मन की प्यास बुझा दे, हे अंजनी के ललना

पारंपरिक
श्री राम भजन Bhajan Hanuman Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

मेरे मन की प्यास बुझा दे,

हे अंजनी के ललना,

चाहूँ मैं तुमसे मिलना बालाजी,

चाहूँ मैं तुमसे मिलना ॥

सबसे हटके है तेरी कहानियां,

करदे मुझपे भी तू मेहरबानियाँ,

पल पल बाबा मैं तुझको पुकारूँ,

दूर कर दे मेरी परेशानियां,

राम दुलारे मुझपे भी तू,

अपनी करुणा करना,

चाहूँ मैं तुमसे मिलना बालाजी,

चाहूँ मैं तुमसे मिलना ॥

तेरा सारी ही दुनिया पे जोर है,

करता दुखियों की तू बाबा गौर है,

तेरे करतब बड़े ही निराले,

हर युग में रहा तेरा शोर है,

संकट हारी बालाजी,

दुःख मेरे भी तू हरना,

चाहूँ मैं तुमसे मिलना बालाजी,

चाहूँ मैं तुमसे मिलना ॥

तेरी चर्चा है सारे जहान में,

मुझको भी तू खुशियों का दान दे,

तेरे दर पे है अर्जी लगाई,

तेरे चरणों की सौगंध है खाई,

मेरे भी सर पे तू बाबा,

हाथ दया का धरना,

चाहूँ मैं तुमसे मिलना बालाजी,

चाहूँ मैं तुमसे मिलना ॥

मन में तेरी ही ज्योति जगा ली,

मैंने तुझसे ही आस लगा ली,

आज मेरी भी बिगड़ी बना दो,

खड़ा दर तेरे बनके सवाली,

‘राज मेहर’ के दामन को,

खुशियों से बाबा भरना,

चाहूँ मैं तुमसे मिलना बालाजी,

चाहूँ मैं तुमसे मिलना ॥

मेरे मन की प्यास बुझा दे,

हे अंजनी के ललना,

चाहूँ मैं तुमसे मिलना बालाजी,

॥ दोहा ॥

चाहूँ मैं तुमसे मिलना ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।