मेरे घनश्याम से तुम मिला दो

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

मेरे घनश्याम से तुम मिला दो,

मैं हूँ उनका यार पुराना,

उनसे बिछड़े हुआ जमाना,

याद मुझे उनकी आयी है,

अखियाँ मेरी भर आयी है,

मैं तो आया हूँ इस दर पे,

मिला दो मिला दो,

अरे द्वारपालों,

मेरे घनश्याम से तुम मिला दों ॥

नाम मेरा बता दो,

हाल सारा सुना दो,

उनसे कहदो के द्वारे,

सुदामा खड़ा,

इतने में वो तो जान ही लेंगे,

बस मुझको पहचान ही लेंगे,

मैं तो आया हूँ इस दर पे,

मिला दो मिला दो,

अरे द्वारपालों,

मेरे घनश्याम से तुम मिला दों ॥

जाके प्रभु को बताया,

हाल सारा सुनाया,

प्रभु द्वारे पे मिलने,

सुदामा खड़ा,

है वो सूरत से भोला,

मुझसे हक से वो बोला,

वो बताता है नाता,

पुराना बडा,

इतनी सुनकर प्रभु उठ भागे,

नंगे पैरों दौड़न लागे,

मेरा आया है आज यार,

मिला दो मिला दो,

अरे द्वारपालों,

मेरे बालसखा से मिला दो ॥

दुर्दशा जो सुदामा की,

देखे कन्हैया,

तो आंखों से अश्रु,

बरसने लगे,

बिठा अपनी गद्दी पे,

ढाढस बँधाया,

और हाथो से चरणों को,

धोने लगे,

इतने दिन तू क्यों दुख पाया,

क्या तुझको मैं याद ना आया,

तूने दुखाया दिल यार,

लगाले लगाले लगाले सुदामा,

अपने सीने से मुझको लगा ले ॥

मैं हूँ उनका यार पुराना,

उनसे बिछड़े हुआ जमाना,

याद मुझे उनकी आयी है,

अखियाँ मेरी भर आयी है,

मैं तो आया हूँ इस दर पे,

मिला दो मिला दो,

अरे द्वारपालों,

मेरे घनश्याम से तुम मिला दो,

॥ दोहा ॥

मेरे घनश्याम से तुम मिला दो ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।