॥ पावन पाठ ॥
मेरे गणपति राजा आजा
तू आजा लड्डू खा जा
मैं देखू तुझको तुझको यु ही खड़े
मेरे बिगड़े भाग बना जा सोई तकदीर जगा जा
आजा अब तो आजा अरे
मेरे गणपति राजा आजा ॥
रिधि सीधी के स्वामी तुम को
मुश्क की सवारी करते हो
हम आये शरण तिहारी तुझपे जाए बलिहारी मेरी विपता सारी टारी अरे
मेरे गणपति राजा आजा ॥
भोले शंकर की आँख के तारे हो माँ गोरा के राज दुलारे हो
देवो में सब से उचे सब तुसे आके पूछे मन चित है चरण तिहारे पड़े
मेरे गणपति राजा आजा ॥
भगतो की रकक्षा करते हो बिन मांगे ही झोली भरते हो
आजाओ घज मुख धारी तेरी महिमा सब से न्यारी सब है तेरे दर पे खड़े
॥ दोहा ॥
मेरे गणपति राजा आजा ॥