हृदय सिंहासन आपका, बिराजो नंदनंदन।
नैनन में छवि आपकी, वंदन बारंबार॥
मेरे दिल में समाए रहो श्याम प्यारे, कभी दूर हमसे ना होना।
तेरा दर्शन ही जीवन हमारा है, इसे भूल से भी ना खोना॥
मेरे दिल में समाए रहो श्याम प्यारे॥
सूरत सलोनी मूरत सुहानी, बाँसुरी की वो मधुर तान पुरानी।
तेरी मुस्कान पे बलिहार जाऊं, जनम जनम तेरे ही गुण गाऊं॥
नैनों के तारे हो तुम हमारे, मेरे दिल में समाए रहो श्याम प्यारे॥
जब भी पुकारूँ सम्मुख आ जाना, अपनी कृपा का रस बरसाना।
हँसते हुए हर दुख कट जाए, तेरी शरण में मुक्ति मिल जाए॥
तुम ही सहारे हो जग के पालनहारे, मेरे दिल में समाए रहो श्याम प्यारे॥
संजय मित्तल का मन मंदिर बन गया, सांवरिया जब से इसमें समा गया।
जय श्री श्याम का जाप करेंगे, भवसागर से पार उतरेंगे॥
मेरे दिल में समाए रहो श्याम प्यारे, कभी दूर हमसे ना होना॥
अविनाशी प्रभु सांवरो, अंतर घट में वास।
संजय मित्तल प्रेम सों, पूरण कीजो आस॥