मेरे बाबा तुझे किसने सजाया, दिल गया हार सांवरे

संत सूरदास
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Vishnu Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

मेरे बाबा तुझे किसने सजाया,

दिल गया हार सांवरे,

मैं मुड़ मुड़ दर तेरे आया,

मुड़ मुड़ दर तेरे आया,

दिल गया हार सांवरे,

मेरे बाबा तुझें किसने सजाया,

दिल गया हार सांवरे ॥

मोर मुकुट कानो में कुण्डल,

सूर्य प्रभात सा है मुख मंडल,

तेरा रूप देख मन हर्षाया,

तेरा रूप देख मन हर्षाया,

दिल गया हार सांवरे,

मेरे बाबा तुझें किसने सजाया,

दिल गया हार सांवरे ॥

मोहिनी सूरत छटा अति प्यारी,

देवता भी जाते है बलिहारी,

किसने फूलों से श्रृंगार कराया,

किसने फूलों से श्रृंगार कराया,

दिल गया हार सांवरे,

मेरे बाबा तुझें किसने सजाया,

दिल गया हार सांवरे ॥

स्वर्ग से सुन्दर तेरा नज़ारा,

‘सुमित’ को बाबा दे दो सहारा,

अपने भावों से ‘रजत’ ने रिझाया,

अपने भावों से ‘रजत’ ने रिझाया,

दिल गया हार सांवरे,

मेरे बाबा तुझें किसने सजाया,

दिल गया हार सांवरे ॥

मेरे बाबा तुझे किसने सजाया,

दिल गया हार सांवरे,

मैं मुड़ मुड़ दर तेरे आया,

मुड़ मुड़ दर तेरे आया,

दिल गया हार सांवरे,

मेरे बाबा तुझें किसने सजाया,

॥ दोहा ॥

दिल गया हार सांवरे ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।