मेले चलिये चिन्तापूर्णी दे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Maa Durga Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

सोन महीने दी रूत आई

संगता नू होवे बधाई

मेला लगेया उथे भारी

रोनका लगीया चिन्तापूर्णी दे

भगता ने खींची त्यारी

मेले चलिये चिन्तापूर्णी दे

संतो की वाणी लिरिक्स

दुरो दुरो आईया संगता

दर तेरे ते लेके मनता

आस मुराद माँ पूरी करदी

असी मांगते चिन्तापूर्णी दे

भगता ने खींची त्यारी

मेले चलिये चिन्तापूर्णी दे

किते कढ़ी चोल किते पुड़ियां छोले

जो वीं खावे जै माँ बोले

खालो चाह दे नाल पकोड़े

लंगर लगे चिन्तापूर्णी दे

भगता ने खींची त्यारी

मेले चलिये चिन्तापूर्णी दे

सोहनिया भेटा सागर गावै

माँ नू गा के अर्ज सुनावे

कुलदीप पियरिया लिखदा भेटा

राये पियरिया लिखदा भेटा

दर आके चिन्तापूर्णी दे

भगता ने खींची त्यारी

मेले चलिये चिन्तापूर्णी दे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।