महक उठा घर बार मेरा माँ, इक तेरे आ जाने से

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Maa Durga Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

महक उठा घर बार मेरा माँ,

इक तेरे आ जाने से,

इसी तरह ही आते रहना,

किसी ना किसी बहाने से,

किसी ना किसी बहाने से माँ,

किसी ना किसी बहाने से,

मेहक उठा घर बार मेरा माँ,

इक तेरे आ जाने से,

इसी तरह ही आते रहना,

किसी ना किसी बहाने से ॥

घर में तेरी पूजा करते,

मन से तुझको ध्याते माँ,

किसी ना किसी बहाने आओ माँ,

हर पल यही मनाते माँ,

हर पल यही मनाते माँ,

आज हुई है किरपा तेरी,

भूलूं ना मैं भुलाने से,

इसी तरह ही आते रहना,

किसी ना किसी बहाने से ॥

हाथ कृपा का तेरे मैया,

सदा रहे घर बार में,

तुझको कभी ना भूलूं मैया,

सुख के इस संसार में,

सुख के इस संसार में,

सुख और दुःख तो तुझसे मैया,

कहता मैं ये ज़माने से,

इसी तरह ही आते रहना,

किसी ना किसी बहाने से ॥

जैसे फूलों की खुशबू से,

महक उठा दरबार तेरा,

वैसे किरपा कर दे भवानी,

महक उठे परिवार मेरा,

महक उठे परिवार मेरा,

जब भी बुलाउं तुम आ जाना,

‘पंकज’ के माँ बुलाने से,

इसी तरह ही आते रहना,

किसी ना किसी बहाने से ॥

महक उठा घर बार मेरा माँ,

इक तेरे आ जाने से,

इसी तरह ही आते रहना,

किसी ना किसी बहाने से,

किसी ना किसी बहाने से माँ,

किसी ना किसी बहाने से,

मेहक उठा घर बार मेरा माँ,

इक तेरे आ जाने से,

इसी तरह ही आते रहना,

किसी ना किसी बहाने से ॥

दुर्गा चालीसा | आरती: जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी | आरती: अम्बे तू है जगदम्बे काली | महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम् | माता के भजन

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।