मीठे रस से भरयो री राधा रानी लागे मने प्यारो प्यारो यमुना जी को मीठो पानी लागे

देवी चित्रलेखा
श्री कृष्ण भजन भजन देवी चित्रलेखा
॥ दोहा ॥

अमृत रस बरसे जहां, बरसाने की ठौर।
देवी चित्रलेखा गावती, नाचे हिय में मोर॥

॥ चौपाई ॥

मीठे रस से भरयो री, राधा रानी लागे।
मने प्यारो प्यारो, यमुना जी को पानी लागे॥

यमुना मैया कारी कारी, राधा गोरी गोरी।
वृन्दावन में धूम मचायो, बरसाने की छोरी॥
ब्रज धाम की माटी लागे मने चंदन जैसी।
राधा रानी लागे मने प्यारो प्यारो, यमुना जी को पानी लागे॥

कान्हा नित मुरली बजावे, राधा नाम गावे।
राधा जी के चरणों में, शीश झुकावे॥
सखियों संग झूमे रास बिहारी।
राधा रानी लागे मने प्यारो प्यारो, यमुना जी को पानी लागे॥

देवी चित्रलेखा गावे रस की गागर।
राधा रानी करुणा की अथाह सागर॥
बरसाने वाली की जय जयकार लागे।
राधा रानी लागे मने प्यारो प्यारो, यमुना जी को पानी लागे॥

॥ दोहा ॥

राधा नाम रस माधुरी, त्रिभुवन सुख दातार।
देवी चित्रलेखा वंदन करे, जय जय ब्रज सरकार॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

श्री राधा रानी के मधुर रस, यमुना जी के पावन जल और बरसाने के अमृतमय वातावरण का उल्लासपूर्ण ब्रज रस भजन।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।