मत बरसो इन्दर राज

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Maa Durga Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

अजी मत बरसो इन्दर राज,

या जग सेठाणी भीजे,

या जग सेठाणी भीजे,

म्हारी राज राणी भीजे,

अजी मत बरसों इन्दर राज,

या जग सेठाणी भीजे ॥

गुम्बज पर मेवा बरसे,

मंदिर पर मेवा बरसे,

अजी पौढ़ी पर अमृत धार,

मोटी सेठाणी भीजे,

अजी मत बरसों इन्दर राज,

या जग सेठाणी भीजे ॥

सावन की रुत मतवाली,

झूले में झूंझण वाली,

अरे सह पावे ना बौछार,

या जग सेठाणी भीजे,

अजी मत बरसों इन्दर राज,

या जग सेठाणी भीजे ॥

झूंझण से खबरिया आई,

सब चलो लोग लुगाई,

ले चलो छतर हजार,

या जग सेठाणी भीजे,

अजी मत बरसों इन्दर राज,

या जग सेठाणी भीजे ॥

पानी के मैया बहाने,

इन्दर आयो दर्शन पाने,

जया मेरो धन्य हुयो परिवार,

दादी चरणा ने छूके,

अजी मत बरसों इन्दर राज,

या जग सेठाणी भीजे ॥

अजी मत बरसो इन्दर राज,

या जग सेठाणी भीजे,

या जग सेठाणी भीजे,

म्हारी राज राणी भीजे,

अजी मत बरसो इन्दर राज,

या जग सेठाणी भीजे ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।