मंजिल तक कैसे पहुँचा जाए - प्रेरक कहानी

पारंपरिक
श्री राम कथा Prerak-kahani Khali Bori Prerak-kahani
॥ पावन पाठ ॥

एक बार एक संत ने अपने दो भक्तों को बुलाया और कहा आप को यहाँ से पचास कोस जाना है।

एक भक्त को एक बोरी खाने के समान से भर कर दी और कहा जो लायक मिले उसे देते जाना। और एक को खाली बोरी दी उससे कहा रास्ते मे जो उसे अच्छा मिले उसे बोरी मे भर कर ले जाए।

दोनो निकल पड़े जिसके कंधे पर समान था वो धीरे चल पा रहा था। खाली बोरी वाला भक्त आराम से जा रहा था। थोड़ी दूर उसको एक सोने की ईंट मिली उसने उसे बोरी मे डाल लिया। थोड़ी दूर चला फिर ईंट मिली उसे भी उठा लिया।

जैसे-जैसे चलता गया उसे सोना मिलता गया और वो बोरी मे भरता हुआ चल रहा था। और बोरी का वजन बढ़ता गया उसका चलना मुश्किल होता गया और साँस भी चढ़ने लग गई। एक एक कदम आगे चलना कठिन होता गया।

दूसरा भक्त जैसे-जैसे चलता गया रास्ते मै जो भी मिलता उसको बोरी मे से खाने का कुछ समान देता गया धीरे-धीरे बोरी का वजन कम होता गया। और उसका चलना आसान होता गया। जो बाँटता गया उसका गंतव्य स्थान तक पहुँचना आसान होता गया। और जो लालच मे आकर इकट्ठा करता रहा वो रास्ते मे ही दम तोड़ गया।

हम सभी को अब ये सोचना चाहिए कि हमने जीवन में क्या बाँटा और क्या इकट्ठा किया हम मंजिल तक कैसे पहुँच पाएँगे।

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

एक बार एक संत ने अपने दो भक्तों को बुलाया और कहा आप को यहाँ से पचास कोस जाना है। एक भक्त को एक बोरी खाने के समान से भर कर दी और एक को खाली बोरी दी...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।