मंगल मूर्ति रूप लेकर गणपति जी आ गए

पारंपरिक
महादेव भजन Bhajan Vighneswaray Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

मंगल मूर्ति रूप लेकर गणपति जी आ गए,

भक्त जनों के दिल पर देवा दूर दूर तक छा गए,

गणपति बप्पा मोरया मंगलमूर्ति मोरया ॥

अब ना कोई दुखी रहेगा देवा का आशीष बरसेगा,

अंधे को आँखे मिलेंगी लंगड़ा भी अब दौड़ पड़ेगा,

भक्ति की सच्ची लगन सद् भक्तों को लगा गए,

मंगलमूर्ति रूप लेकर गणपति जी आ गए ॥

शिव शक्ति के लाल प्यारे देते हैं सुख के उजियारे,

तीनों लोक में गूँज रहे हैं सिद्धि विनायक के जयकारे,

कितनी ही डगमग नैया को बप्पा पार लगा गए,

मंगल मूर्ति रूप लेकर गणपति जी आ गए ॥

इच्छा पूर्ति कहलाते हैं कृपा अमृत बरसाते हैं,

प्रेम से सबको निहारते हैं भाग्य सबके सँवारते हैं,

जीवन की मुरझाई बगिया सुगंध से महका गए,

मंगलमूर्ति रूप लेकर गणपति जी आ गए ॥

SantoKiVani Lyrics

अहंकार का नाश करते भक्तों के घर वास करते,

अपने दिव्य चमत्कार से पतझड़ को मधुमास करते,

घर आंगन में रंग बिरंगे सुख के फूल खिला गए,

॥ दोहा ॥

मंगल मूर्ति रूप लेकर गणपति जी आ गए ॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

भजन: मंगल मूर्ति रूप लेकर गणपति जी आ गए | Bhajan: Mangal Murti Roop Lekar Ganpati Ji Aa Gaye Ke Lyrics Hindi Aur English Main

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।