मन चल वृंदावन धाम जहां विराजे राधा रानी

इंद्रेश जी महाराज
श्री कृष्ण भजन भजन इंद्रेश जी महाराज
॥ दोहा ॥

वृंदावन सम तीरथ नहीं, राधा सम नहीं कोय।
इंद्रेश चल उस धाम में, जीवन पावन होय॥

॥ चौपाई ॥

मन चल वृंदावन धाम, जहां विराजे राधा रानी।
राधा रानी, महारानी, बरसाने की पटरानी॥
मन चल वृंदावन धाम॥

यमुना जी का पावन किनारा, बंशीवट की छाँव।
निधिवन में जहां रास रचे हैं, अति सुंदर वो गाँव॥
कदम की छाँव में बंशी बाजे, अमृत बरसे पानी।
मन चल वृंदावन धाम, जहां विराजे राधा रानी॥

बांके बिहारी के दर्शन पाके, मिटे जनम के पाप।
राधा नाम के सुमिरन से ही, भागे तीनों ताप॥
संत महंत करें गुणगान, जिसकी गाथा सुहानी।
मन चल वृंदावन धाम, जहां विराजे राधा रानी॥

इंद्रेश कहे ब्रज रज में लोटू, तन मन शीतल होय।
श्री राधा की कृपा बिना, कन्हैया मिले न कोय॥
भवसागर से तर जाए वो, जिसने राधा जानी।
मन चल वृंदावन धाम, जहां विराजे राधा रानी॥

॥ दोहा ॥

वृंदा विपिन सुखद घनो, जहँ राजत श्री कंत।
इंद्रेश शरण गहे सदा, वंदन करे अनंत॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

मन को सांसारिक विकारों से हटाकर श्री राधा रानी के पावन धाम वृंदावन की शरण में जाने का आध्यात्मिक संदेश।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।