मैया के दर पे नज़ारा मिलता है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Mata Rani Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

मैया के दर पे नजारा मिलता है,

निगाह जा रही है,

मेरी माँ की रहमत,

नज़र आ रही है,

ना लौटा है आज तक,

कोई दर से खाली,

मुरादों से झोली,

भरी जा रही है ॥

मैया के दर पे नजारा मिलता है,

ग़म के मारों को सहारा मिलता है,

मैया ने बदली है सबकी तक़दीरें,

सबकी कश्ती को किनारा मिलता है,

मैया के दर पे नज़ारा मिलता है ॥

आज माँ के जागरण की रात है आई,

आज खुशियों की हमें सौगात है आई,

है बड़ी प्यारी बड़ी न्यारी बड़ी पावन,

माँ के दर्शन के लिए मैं भेंट हूँ लाई,

सारे भक्तों को सहारा मिलता है,

ग़म के मारों को सहारा मिलता है,

मैया के दर पे नज़ारा मिलता है ॥

भरदे दामन में मेरे सुख सागर के मोती,

तू ही रचना में जगा मेरे ज्ञान की ज्योति,

तेरी कला की कलियों से महके जीवन मेरा,

अमृत की वर्षा सारे ही पापों को धोती,

माँ की चौखट से नज़ारा मिलता है,

ग़म के मारों को सहारा मिलता है,

मैया के दर पे नज़ारा मिलता है ॥

बेसहारों को सहारा मिल ही जाएगा,

माँ की ममता का सहारा मिल ही जाएगा,

‘कमल किशोर’ जो श्रद्धा से दर पे जायेगा,

रहमत बरसेगी कवी का दिल भी गायेगा,

सबकी किस्मत का सितारा खिलता है,

ग़म के मारों को सहारा मिलता है,

मैया के दर पे नज़ारा मिलता है ॥

मैया के दर पे नज़ारा मिलता है,

ग़म के मारों को सहारा मिलता है,

मैया ने बदली है सबकी तक़दीरें,

सबकी कश्ती को किनारा मिलता है,

मैया के दर पे नज़ारा मिलता है ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।