मईया जी मेरे हाथ को, अब थाम लीजिये

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Navratri Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

मैया जी मेरे हाथ को,

अब थाम लीजिये ॥

दोहा – रोता हूँ जार जार,

कुछ असर ही नहीं है,

लगता है मेरी मात को,

मेरी फ़िकर ही नहीं है ॥

मैया जी मेरे हाथ को,

अब थाम लीजिये,

मजबूर हूँ माँ मैं बड़ा,

मजबूर हूँ माँ मैं बड़ा,

अब ध्यान दीजिये,

मईया जी मेरे हाथ को,

अब थाम लीजिये ॥

कर ना सको जो माँ मेरी,

माँगा नहीं है वो,

सहने ना पाऊं मैं जिसे,

लागा है घाव वो,

अपनी दया का अब मुझे,

कुछ दान दीजिये,

मजबूर हूँ माँ मैं बड़ा,

मजबूर हूँ माँ मैं बड़ा,

अब ध्यान दीजिये,

मईया जी मेरे हाथ को,

अब थाम लीजिये ॥

लगता है मेरी बात का,

कुछ भी असर नहीं,

बेटे की मात क्या तुझे,

कुछ भी फिकर नहीं,

हालात है बुरे ओ माँ,

ये जान लीजिये,

मजबूर हूँ माँ मैं बड़ा,

मजबूर हूँ माँ मैं बड़ा,

अब ध्यान दीजिये,

मईया जी मेरे हाथ को,

अब थाम लीजिये ॥

हमने सुना है दीन पे,

करती हो तुम दया,

कहने में तुमसे माँ मेरी,

आती नहीं हया,

तेरे ‘हर्ष’ का रुका हुआ,

हर काम कीजिये,

मजबूर हूँ माँ मैं बड़ा,

मजबूर हूँ माँ मैं बड़ा,

अब ध्यान दीजिये,

मईया जी मेरे हाथ को,

अब थाम लीजिये ॥

* SantoKiVani Lyrics

मईया जी मेरे हाथ को,

अब थाम लीजिये,

मजबूर हूँ माँ मैं बड़ा,

मजबूर हूँ माँ मैं बड़ा,

अब ध्यान दीजिये,

मईया जी मेरे हाथ को,

अब थाम लीजिये ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।