मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान

पारंपरिक
श्री राम भजन Bhajan Hanuman Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान,

सागर में नैया डाल दई ॥

काहे की या नाव बनाई,

काहे की पतवार,

रामा काहे की लगा दी जंजीर,

सागर में नैया डार दई,

मैने तेरे ही भरोसे हनुमान,

सागर में नैया डाल दई ॥

राम नाम की नाव बनाई,

भक्ति की पतवार,

ओ रामा ज्ञान की लगा दी जंजीर,

सागर में नैया डार दई,

मैने तेरे ही भरोसे हनुमान,

सागर में नैया डाल दई ॥

कौन सखी वामें बैठनहारे,

कौन है खेवनहार,

रामा कौन लगाहे बेड़ा पार,

सागर में नैया डार दई,

मैने तेरे ही भरोसे हनुमान,

सागर में नैया डाल दई ॥

सीता मैया बैठनहारी,

लक्ष्मण खेवनहार,

मोरे राम जी लगावे बेड़ा पार,

सागर में नैया डार दई,

मैने तेरे ही भरोसे हनुमान,

सागर में नैया डाल दई ॥

तुलसीदास आस रघुवर की,

चरणन में बलिहार,

मोरे बालाजी लगाहे बेडा पार,

सागर में नैया डार दई,

मैने तेरे ही भरोसे हनुमान,

सागर में नैया डाल दई ॥

मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान,

॥ दोहा ॥

सागर में नैया डाल दई ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।