मैंने मन को मंदिर बनाया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Vighneswaray Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

मैंने मन को मंदिर बनाया,

ओ गौरी मैया के लाला,

तेरी मूरत को उसमे सजाया,

ओ गौरी मैया के लाला,

ओ गौरी मैया के लाला ॥

हर कारज में जो भी प्राणी,

तुझको प्रथम ही ध्यावे,

किसी किस्म की हानि ना हो,

काम सिद्ध हो जावे,

गजमुख वाले ओ रखवाले,

गजमुख वाले ओ रखवाले,

कर हमपे तू करम,

कर हमपे तू करम,

मैने मन को मंदिर बनाया,

ओ गौरी मैया के लाला ॥

नतमस्तक जो तेरे होवे,

तर जावे वो संसारी,

रिद्धि सिद्धि तू ही देता,

मूसे की करे सवारी,

तू गुणवन्ता तू भगवंता,

तू गुणवन्ता तू भगवंता,

कर सबपे तू करम,

कर सबपे तू करम,

मैने मन को मंदिर बनाया,

ओ गौरी मैया के लाला ॥

तू संचालक सबका मालिक,

विघ्न विनाश को टाले,

तू गुणवन्ता तू भगवंता,

सबको तू ही संभाले,

ओ गणनायक ओ सुखदायक,

ओ गणनायक ओ सुखदायक,

नमन करे तुझे हम,

नमन करे तुझे हम,

मैने मन को मंदिर बनाया,

ओ गौरी मैया के लाला ॥

मैंने मन को मंदिर बनाया,

ओ गौरी मैया के लाला,

तेरी मूरत को उसमे सजाया,

ओ गौरी मैया के लाला,

॥ दोहा ॥

ओ गौरी मैया के लाला ॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

भजन: मैंने मन को मंदिर बनाया | Bhajan: Maine Mann Ko Mandir Banaya Ke Lyrics Hindi Aur English Main

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।