मैं नहीं, मेरा नहीं, यह तन

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Vishnu Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

मैं नहीं, मेरा नहीं,

यह तन किसी का है दिया ।

जो भी अपने पास है,

वह धन किसी का है दिया ॥

देने वाले ने दिया,

वह भी दिया किस शान से ।

मेरा है यह लेने वाला,

कह उठा अभिमान से

मैं, मेरा यह कहने वाला,

मन किसी का है दिया ।

मैं नहीं, मेरा नहीं,

यह तन किसी का है दिया ।

जो भी अपने पास है,

वह धन किसी का है दिया ॥

जो मिला है वह हमेशा,

पास रह सकता नहीं ।

कब बिछुड़ जाये यह कोई,

राज कह सकता नहीं ।

जिन्दगानी का खिला,

मधुवन किसी का है दिया ।

मैं नहीं, मेरा नहीं,

यह तन किसी का है दिया ।

जो भी अपने पास है,

वह धन किसी का है दिया ॥

जग की सेवा खोज अपनी,

प्रीति उनसे कीजिये ।

जिन्दगी का राज है,

यह जानकर जी लीजिये ।

साधना की राह पर,

यह साधन किसी का है दिया ।

मैं नहीं, मेरा नहीं,

यह तन किसी का है दिया ।

जो भी अपने पास है,

वह धन किसी का है दिया ॥

जो भी अपने पास है,

वह सब किसी का है दिया ।

मैं नहीं, मेरा नहीं,

यह तन किसी का है दिया ।

जो भी अपने पास है,

वह धन किसी का है दिया ।

Santo Ki Vani Lyrics

मैं नहीं, मेरा नहीं,

यह तन किसी का है दिया ।

जो भी अपने पास है,

॥ दोहा ॥

वह धन किसी का है दिया ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।