मैं हूँ दासी तेरी दातिए

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Maa Durga Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

मैं हूँ दासी तेरी दातिए,

सुन ले विनती मेरी दातिए,

मैया जब तक जियूं,

मैं सुहागन रहूं,

मुझको इतना तू वरदान दे,

मै हूँ दासी तेरी दातिए,

सुन ले विनती मेरी दातिए ॥

मेरा प्राणो से प्यारा पति,

मुझसे बिछड़े ना रूठे कभी,

माता रानी इसे मेरी आयु लगे,

ये मनोकामना है मेरी,

माँ तेरे लाल की,

माँ तेरे लाल की मैं हूँ अर्धांगिनी,

मै हूँ दासी तेरी दातिए,

सुन ले विनती मेरी दातिए ॥

मै हूँ दासी तेरी दातिए,

सुन ले विनती मेरी दातिए,

मैया जब तक जियूं,

मैं सुहागन रहूं,

मुझको इतना तू वरदान दे,

मै हूँ दासी तेरी दातिए,

सुन ले विनती मेरी दातिए ॥

मैया तू ही मेरी आस है,

मेरा तुझपे ही विश्वास है,

आसरा है तेरा,

मुझपे करना दया,

मेरी तुझसे ये अरदास है,

बिन तेरे प्यार के,

बिन तेरे प्यार के क्या मेरे पास है,

मै हूँ दासी तेरी दातिए,

सुन ले विनती मेरी दातिए ॥

मै हूँ दासी तेरी दातिए,

सुन ले विनती मेरी दातिए,

मैया जब तक जियूं,

मैं सुहागन रहूं,

मुझको इतना तू वरदान दे,

मै हूँ दासी तेरी दातिए,

सुन ले विनती मेरी दातिए ॥

मैं हूँ दासी तेरी दातिए,

सुन ले विनती मेरी दातिए,

मैया जब तक जियूं,

मैं सुहागन रहूं,

मुझको इतना तू वरदान दे,

मै हूँ दासी तेरी दातिए,

सुन ले विनती मेरी दातिए ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।