महिमा राम नाम की - प्रेरक कहानी

पारंपरिक
श्री राम कथा Prerak-kahani Company Prerak-kahani
॥ पावन पाठ ॥

एक आदमी बर्फ बनाने वली कम्पनी में काम करता था. एक दिन कारखाना बन्द होने से पहले अकेला फ्रिज करने वाले कमरे का चक्कर लगाने गया तो गलती से दरवाजा बंद हो गया। और वह अंदर बर्फ वाले हिस्से में फंस गया छुट्टी का वक़्त था और सब काम करने वाले लोग घर जा रहे थे। किसी ने भी अधिक ध्यान नहीं दिया की कोई अंदर फंस गया है।

वह समझ गया की दो-तीन घंटे बाद उसका शरीर बर्फ बन जाएगा अब जब मौत सामने नजर आने लगी तो, भगवान को सच्चे मन से याद करने लगा। अपने कर्मों की क्षमा मांगने लगा और भगवान से कहा कि प्रह्लाद को तुमने अग्नि से बचाया, अहिल्या को पत्थर से नारि बनाया, शबरी के जुठे बेर खाकर उसे स्वर्ग में स्थान दिया। प्रभु अगर मैंने जिंदगी में कोई एक काम भी मानवता व धर्म का किया है तो तूम मुझे यहाँ से बाहर निकालो। मेरे बीवी बच्चे मेरा इंतज़ार कर रहे होंगे। उनका पेट पालने वाला इस दुनिया में सिर्फ मैं ही हूँ। मैं पुरे जीवन आपके इस उपकार को याद रखूंगा और इतना कहते कहते उसकी आंखों से आंसू निकलने लगे।

एक घंटे ही गुजरे थे कि अचानक फ़्रीजर रूम में खट खट की आवाज हुई। दरवाजा खुला चौकीदार भागता हुआ आया। उस आदमी को उठाकर बाहर निकाला और गर्म हीटर के पास ले गया। उसकी हालत कुछ देर बाद ठीक हुई तो उसने चौकीदार से पूछा, आप अंदर कैसे आए? चौकीदार बोला कि साहब मैं 20 साल से यहां काम कर रहा हूं। इस कारखाने में काम करते हुए हर रोज सैकड़ों मजदूर और ऑफिसर कारखाने में आते जाते हैं। मैं देखता हूं लेकिन आप उन कुछ लोगों में से हो, जो जब भी कारखाने में आते हो तो मुझसे हंस कर राम राम करते हो और हालचाल पूछते हो और निकलते हुए आपका राम राम काका कहना मेरी सारे दिन की थकावट दूर कर देता है। जबकि अक्सर लोग मेरे पास से यूं गुजर जाते हैं कि जैसे मैं हूं ही नहीं।

आज हर दिनों की तरह मैंने आपका आते हुए अभिवादन तो सुना लेकिन राम राम काका सुनने के लिए इंतज़ार करता रहा। जब ज्यादा देर हो गई तो मैं आपको तलाश करने चल पड़ा कि कहीं आप किसी मुश्किल में ना फंसे हो। वह आदमी हैरान हो गया कि किसी को हंसकर राम राम कहने जैसे छोटे काम की वजह से आज उसकी जान बच गई।

राम कहने से तर जाओगे

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

Prerak Kahani: Mahima Ram Naam Ki - प्रेरक कहानी: महिमा राम नाम की

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।