महेन्द्र कपूर

पारंपरिक
अन्य संत साहित्य Bhakt Mahendra Kapoor Bhakt
॥ पावन पाठ ॥

भक्त गायक | महेन्द्र कपूर

ख्याति - प्रसिद्ध भारतीय पार्श्व गायक

जन्म तिथि - 9 जनवरी 1934

जन्म स्थान - अमृतसर, पंजाब, ब्रिटिश भारत (पालन-पोषण: मुंबई)

पिता - अमरीक लाल कपूर

माता - श्रीमती कपूर

करियर / कार्यक्षेत्र - हिंदी, पंजाबी, मराठी व गुजराती में हजारों गीतों का गायन; बी. आर. चोपड़ा के टीवी धारावाहिक 'महाभारत' का शीर्षक गीत; राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार तथा पद्म श्री (1972) से सम्मानित

पत्नी - प्रवीण कपूर

संतान - 1 पुत्र (रोहन कपूर - गायक/अभिनेता) एवं 3 पुत्रियाँ

निधन - 27 सितंबर 2008 (मुंबई, महाराष्ट्र)

भक्ति भाव और ओजस्वी स्वर के अमर गायक

महेन्द्र कपूर जी का जन्म 9 जनवरी 1934 को अमृतसर, पंजाब में हुआ था। बचपन से ही संगीत के प्रति गहरा अनुराग रखने वाले महेन्द्र कपूर ने शास्त्रीय संगीत की विधिवत तालीम पंडित हुस्नलाल, पंडित भगतराम और उस्ताद अमानत अली खान जैसे दिग्गजों से प्राप्त की। वे प्रसिद्ध गायक मोहम्मद रफी साहब को अपना आदर्श मानते थे। 1950 के दशक में एक राष्ट्रीय गायन प्रतियोगिता जीतकर उन्होंने हिंदी सिनेमा में कदम रखा। अपनी बुलंद, स्पष्ट और ओजपूर्ण आवाज के दम पर उन्होंने बॉलीवुड को अनगिनत देशभक्ति, रोमांटिक और प्रेरणादायी गीत दिए, जिसके लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया।

सिनेमाई गीतों के साथ-साथ महेन्द्र कपूर जी का भक्ति संगीत के क्षेत्र में योगदान अत्यंत अप्रतिम और पावन रहा है। उनकी खनकती और भारी आवाज में ईश्वरीय वंदना एक अलग ही अलौकिक ऊर्जा का संचार करती थी। बी. आर. चोपड़ा की ऐतिहासिक धारावाहिक 'महाभारत' का शीर्षक गीत और कथा गायन उनके भक्तिमय और ओजस्वी स्वर की अमर पहचान बन गया। इसके अतिरिक्त, माता की भेंटें, हनुमान चालीसा, कृष्ण भजन और भगवान शिव की आरतियों में उन्होंने जिस समर्पण और तन्मयता के साथ सुर पिरोए, उसने देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं के हृदय को भक्ति रस से सराबोर कर दिया।

27 सितंबर 2008 को मुंबई में महेन्द्र कपूर जी ने इस नश्वर संसार को अलविदा कह दिया, किंतु उनका आध्यात्मिक और संगीतमय प्रभाव आज भी उतना ही जीवंत है। प्रभात की पहली किरण के साथ मंदिरों में गूंजती आरतियां हों या नवरात्रों के पावन पर्व पर बजने वाले माता के जयकारे, महेन्द्र कपूर जी का दिव्य स्वर हर सनातनी अनुष्ठान का अभिन्न हिस्सा बना हुआ है। सुर और साधना का यह अनूठा संगम आने वाली पीढ़ियों को सदैव ईश्वर के समीप ले जाने और भक्ति मार्ग पर अग्रसर करने का कार्य करता रहेगा।

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

सिनेमाई गीतों के साथ-साथ महेन्द्र कपूर जी का भक्ति संगीत के क्षेत्र में योगदान अत्यंत अप्रतिम और पावन रहा है। In addition to cinematic songs, Mahendra Kapoor's contribution to devotional music has been exceptional and sacred

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।