महर्षि महेश योगी

पारंपरिक
श्री राम संत साहित्य Bhakt Maharishi Mahesh Yogi Bhakt
॥ पावन पाठ ॥

भक्तमाल: महर्षि महेश योगी जी

वास्तविक नाम - महेश प्रसाद वर्मा/श्रीवास्तव

अन्य नाम - द महर्षि, द गिग्लिंग गुरु, द फ्लाइंग गुरु

गुरु - ब्रह्मानंद सरस्वती

आराध्य - भगवान शिव

जन्म - 12 जनवरी 1918

जन्म स्थान - जबलपुर, भोपाल

वैवाहिक स्थिति - अविवाहित

पिता - श्री राम प्रसाद

भाषा - हिंदी, अंग्रेजी

पेशा - योग शिक्षक, आध्यात्मिक गुरु

संस्थापक - ट्रान्सेंडैंटल मेडिटेशन मूवमेंट, ग्लोबल कंट्री ऑफ़ वर्ल्ड पीस

महर्षि महेश योगी एक भारतीय योग गुरु थे, जिन्हें ट्रान्सेंडैंटल मेडिटेशन को विकसित करने और लोकप्रिय बनाने के लिए जाना जाता है, जिसे कई तरह से एक नए धार्मिक आंदोलन और गैर-धार्मिक के रूप में चित्रित किया गया है।

ट्रान्सेंडैंटल मेडिटेशन आंदोलन के संस्थापक महर्षि महेश योगी, जिन्होंने बीटल्स को ध्यान करना सिखाया, 1970 के दशक में "मंत्र" को एक घरेलू शब्द बना दिया। 1955 में, महर्षि ने सार्वजनिक रूप से एक पारंपरिक ध्यान तकनीक सिखाना शुरू किया, जिसे उन्होंने अपने गुरु, ब्रह्मानंद सरस्वती से सीखा था, जिसे उन्होंने ट्रान्सेंडैंटल डीप मेडिटेशन नाम दिया।

महर्षि महेश योगी ने वेदों में निहित ज्ञान पर अनेक ग्रंथों की रचना की। महेश योगी अपनी शिक्षाओं और अपनी शिक्षाओं को फैलाने के लिए आधुनिक तकनीकों का सहारा लेते थे। उन्होंने महर्षि मुक्त विश्वविद्यालय की स्थापना की जिसके माध्यम से 'ऑनलाइन' शिक्षा दी जाती है।

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

महर्षि महेश योगी - Maharishi Mahesh Yogi

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।