महंत अवैद्यनाथ

पारंपरिक
श्री राम संत साहित्य Bhakt Mahant Avaidyanath Bhakt
॥ पावन पाठ ॥

भक्तमालः महंत अवैद्यनाथ

असली नाम - कृपाल सिंह बिष्ट

आराध्य - गोरखनाथ जी, भगवान राम

गुरु - दिग्विजय नाथ

जन्म - 28 मई 1921

स्थान - पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड

मृत्यु - 12 सितम्बर 2014, गोरखपुर

वैवाहिक स्थिति - अविवाहित

पिता - श्री राय सिंह बिष्ट

भाषा - हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, गढ़वाल

शिष्य - योगी आदित्यनाथ

प्रसिद्ध - गोरखनाथ मंदिर के महंत (मुख्य पुजारी) (1969–2014), विधायक

महंत अवैद्यनाथ एक भारतीय राजनीतिज्ञ और हिंदू उपदेशक थे। वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गुरु और गुरु थे। उन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

वह पहली बार गोरखपुर लोकसभा से चौथी लोकसभा के लिए हिंदू महासभा से चुने गए थे। इसके बाद वे नौवीं, दसवीं और ग्यारहवीं लोकसभा के लिए भी चुने गए। योग और दर्शन के पारखी महंतजी के राजनीति में आने का मकसद हिंदू समाज की बुराइयों को दूर करना और राम मंदिर आंदोलन को गति देना था। हिन्दू धर्म में ऊँच-नीच को दूर करने के लिए उन्होंने नित्य भोजों का आयोजन किया। इसके लिए वे संतों के साथ बनारस गए और डोमराजा के घर भोजन किया और समाज की एकजुटता का संदेश दिया।

हिन्दू समाज की एकता उनके प्रवचन के केंद्र में थी। मूलतः वे इतिहास और रामचरितमानस का सहारा लेते थे। शबरी, जटायु, निषादराज और गिरिजनों के साथ श्रीराम के व्यवहार का उदाहरण देकर वे दलित-गरीबों को गले लगाने की प्रेरणा देते थे।

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

महंत अवैद्यनाथ | Mahant Avaidyanath

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।