महामाय़ा अष्टकम्

पारंपरिक
श्री राम मंत्र Mantra Mahamaya Ashtakam Mantra
॥ पावन पाठ ॥

भद्रकाळी बिश्बमाता जगत्स्रोत कारिणी

शिबपत्नी पापहर्त्री सर्वभूत तारिणी

स्कन्दमाता शिवा शिवा सर्वसृष्टि धारिणी

नमः नमः महामाय़ा ! हिमाळय-नन्दिनी ॥ १

नारीणाम्च संखिन्यापि हस्तिनी बा चित्रिणी

पद्मगन्धा पुष्परूपा सम्मोहिनी पद्मिनी

मातृ-पुत्री-भग्नि-भार्य़ा सर्वरूपा भबानी

नमः नमः महामाय़ा ! भबभय-खण्डिनी ॥ २

पाप-ताप-भब-भय़ भूतेश्बरी कामिनी

तब-कृपा-सर्व-क्षय सर्वजना-बन्दिनी

प्रेम-प्रीति-लज्जा-न्याय नारीणाञ्च-मोहिनी

नमः नमः महामाय़ा ! ॠण्डमाळा-धारिणी ॥ ३

खड्ग-चक्र-हस्तेधारी संखीनि-सुनादिनी

संमोहना-रूपा-नारी हृदय-विदारिणी

अहंकार-कामरूपा-भुवन-विळासिनी

नमः नमः महामाय़ा ! जगत-प्रकाशिनी ॥ ४

लह्व-लह्व-तब-जिह्वा पापाशुर मर्द्धिनी

खण्ड-गण्ड-मुण्ड-स्पृहा शोभाकान्ति बर्द्धिनी

अङ्ग-भङ्ग-रंग-काय़ा माय़ाछन्द छन्दिनी

नमः नमः महामाय़ा ! दुःखशोक नाशिनी ॥ ५

धन-जन-तन-मान रूपेण त्वम् संस्थिता

काम-क्रोध-लोभ-मोह-मद बापि मूढता

निद्राहार-काम-भय़ पशुतुल्य़ जीबनात्

नमः नमः महामाय़ा ! कुरु मुक्त बन्धनात् ॥ ६

मैत्री-दय़ा-लक्ष्मी-बृत्ति-अन्ते जीब लक्षणा

लज्जा-छाय़ा-तृष्णा-क्षुधा बन्धनस्य़ कारणा

तुष्टि-बुद्धि-श्रद्धा-भक्ति सदा मुक्ति दाय़ीका

शान्ति-भ्रान्ति-क्ळान्ति-क्षान्ति तब रूपा अनेका

प्रीति-स्मृति-जाति-शक्ति-रूपा माय़ा अभेद्य़ा

नमः नमः महामाय़ा ! नमस्त्वम् महाबिद्य़ा ॥ ७

नबदुर्गा-महाकाळि सर्वाङ्गभूषाबृत्ताम्

भुबनेश्वरी-मातङ्गी हन्तु मधुकैटभं

विमळा-तारा-षोड़शी हस्ते खड्ग धारीणि

धुमाबति-मा-बगळा महिषासुर मर्द्धिनी

बाळात्रिपुरासुन्दरी त्रिभुबन मोहिनी

नमः नमः महामाय़ा ! सर्वदुःख हारिणी ॥ ८

मम माता लोके मर्त्त्य़ कृष्णदास तब भृत्त्य़

य़दा तदा य़था तथा माय़ा छिन्न मोक्ष कथा

सदा सदा तव भिक्षा कृपा दीने भब रक्षा

नम नम महामाय़ा कृष्ण दासे तब दय़ा ॥ ९

॥ दोहा ॥

॥ इति कृष्णदास विरचित महामाय़ा अष्टकम् यः पठति सः भव सागर निस्तरति ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।