महाकाल गंगाधर मेरे

पारंपरिक
महादेव भजन Bhajan Shiv Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

अब कोई ना सहारा बिन तेरे,

महाकाल गंगाधर मेरे ॥

तूने लाखों पापी तारे है,

नहीं गुण और दोष विचारे है,

मैं भी आन पड़ा दर तेरे,

मैं भी आन पड़ा दर तेरे,

महाकाल गंगाधर मेरे,

अब कोईं न सहारा बिन तेरे,

महाकाल गंगाधर मेरे ॥

विषयो के जाल में फसकर के,

झूठी उल्फत में धंसकर के,

दुःख पाए नाथ घनेरे,

दुःख पाए नाथ घनेरे,

महाकाल गंगाधर मेरे,

अब कोईं न सहारा बिन तेरे,

महाकाल गंगाधर मेरे ॥

तू दीन बंधू हितकारी है,

हम दुखिया शरण तिहारी है,

हम दीन हिन है तेरे,

हम दीन हिन है तेरे,

महाकाल गंगाधर मेरे,

अब कोईं न सहारा बिन तेरे,

महाकाल गंगाधर मेरे ॥

भक्त तेरी शरण में आया है,

आके चरणों में शीश झुकाया है,

काटो जनम मरण के फेरे,

काटो जनम मरण के फेरे,

महाकाल गंगाधर मेरे,

अब कोईं न सहारा बिन तेरे,

महाकाल गंगाधर मेरे ॥

अब कोई ना सहारा बिन तेरे,

॥ दोहा ॥

महाकाल गंगाधर मेरे ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।