मात जवाला कर उजियाला

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Maa Durga Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

मात ज्वाला कर उजियाला,

तेरी ज्योत जगाऊँ,

तेरे दरबार आके,

तेरे दरबार आके,

बनके तेरे चरणों का सेवक,

मुँह माँगा वर पाऊँ,

तेरे दरबार आके,

तेरे दरबार आके ॥

माँ अम्बे रानिये,

कितना प्यारा तेरा धाम है,

हर दुःख से दूर है वो,

जिसकी जुबां पे तेरा नाम है,

मोह माया को,

मोह माया को मन से भगा के,

तेरा ध्यान लगाऊं,

तेरे दरबार आके,

तेरे दरबार आके।।

मात ज्वाला कर उजियाला,

तेरी ज्योत जगाऊँ,

तेरे दरबार आके,

तेरे दरबार आके ॥

तुम हो वरदानी मैया,

वर दे दे करदे पूरी आस तू,

मन का अँधेरा हर ले,

ज्योति का करदे माँ प्रकाश तू,

चरणों में तेरे उम्र गुजारूं,

रंग में तेरे रंग जाऊँ,

तेरे दरबार आके,

तेरे दरबार आके ॥

मात ज्वाला कर उजियाला,

तेरी ज्योत जगाऊँ,

तेरे दरबार आके,

तेरे दरबार आके ॥

तेरे ही दर पे मिलती,

हर दुखियारे को माँ ओट है,

क्यों है ठुकराया मुझको,

कैसी ‘सरल’ में बोलो खोट है,

इस ‘लख्खा’ की,

इस ‘लख्खा’ की सुने ना कोई,

तुझको आन सुनाऊं,

तेरे दरबार आके,

तेरे दरबार आके।।

मात जवाला कर उजियाला,

तेरी ज्योत जगाऊँ,

तेरे दरबार आके,

तेरे दरबार आके ॥

मात जवाला कर उजियाला,

तेरी ज्योत जगाऊँ,

तेरे दरबार आके,

तेरे दरबार आके,

बनके तेरे चरणों का सेवक,

मुँह माँगा वर पाऊँ,

तेरे दरबार आके,

तेरे दरबार आके ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।