माँ शारदे कहाँ तू, वीणा बजा रही हैं

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Maa Saraswati Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

श्लोक:

सरस्वती नमस्तुभ्यं, वरदे कामरूपिणी,

विद्यारम्भं करिष्यामि, सिद्धिर्भवतु मे सदा।

माँ शारदे कहाँ तू,

वीणा बजा रही हैं,

किस मंजु ज्ञान से तू,

जग को लुभा रही हैं ॥

किस भाव में भवानी,

तू मग्न हो रही है,

विनती नहीं हमारी,

क्यों माँ तू सुन रही है । ..x2

हम दीन बाल कब से,

विनती सुना रहें हैं,

चरणों में तेरे माता,

हम सर झुका रहे हैं,

हम सर झुका रहे हैं ।

माँ शारदे कहाँ तू,

वीणा बजा रही हैं,

किस मंजु ज्ञान से तू,

जग को लुभा रही हैं ॥

अज्ञान तुम हमारा,

माँ शीघ्र दूर कर दो,

द्रुत ज्ञान शुभ्र हम में,

माँ शारदे तू भर दे । ..x2

बालक सभी जगत के,

सूत मात हैं तुम्हारे,

प्राणों से प्रिय है हम,

तेरे पुत्र सब दुलारे,

तेरे पुत्र सब दुलारे ।

माँ शारदे कहाँ तू,

वीणा बजा रही हैं,

किस मंजु ज्ञान से तू,

जग को लुभा रही हैं ॥

हमको दयामयी तू,

ले गोद में पढ़ाओ,

अमृत जगत का हमको,

माँ शारदे पिलाओ । ..x2

मातेश्वरी तू सुन ले,

सुंदर विनय हमारी,

करके दया तू हर ले,

बाधा जगत की सारी,

बाधा जगत की सारी ।

माँ शारदे कहाँ तू,

वीणा बजा रही हैं,

किस मंजु ज्ञान से तू,

जग को लुभा रही हैं ॥

माँ शारदे कहाँ तू,

वीणा बजा रही हैं,

किस मंजु ज्ञान से तू,

जग को लुभा रही हैं ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।