माँ राणीसती सुनले, तेरो लाल बुलावे है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Mata Rani Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

माँ राणीसती सुनले,

तेरो लाल बुलावे है,

इब खोल तेरी मुट्ठी,

क्यों जी ने जलावे है,

मां राणीसती सुनले,

तेरो लाल बुलावे है ॥

तेरे होतां क्यों दादी,

टाबर तेरो तरसे,

बिन सावन भादो के,

मेरी आंखड़ल्या बरसे,

क्यों देर करे दादी,

मेरे सबर ना आवे है,

मां राणीसती सुनले,

तेरो लाल बुलावे है ॥

चरना में अरज करूँ,

कल्याण करो मेरो,

मानो नालायक हूँ,

पर टाबर हूँ तेरो,

माँ के बिन बेटे की,

कुंण पीड़ मिटावे है,

मां राणीसती सुनले,

तेरो लाल बुलावे है ॥

तेरी मुट्ठी में दादी,

किस्मत है बंद मेरी,

इने खोल के माँ कर दे,

तक़दीर बुलंद मेरी,

तेरे ‘हर्ष’ की सुन दादी,

क्यों देर लगावे है,

मां राणीसती सुनले,

तेरो लाल बुलावे है ॥

माँ राणीसती सुनले,

तेरो लाल बुलावे है,

इब खोल तेरी मुट्ठी,

क्यों जी ने जलावे है,

मां राणीसती सुनले,

तेरो लाल बुलावे है ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।