माँ! मुझे तेरी जरूरत है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Maa Jhandewali Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

माँ ! मुझे तेरी जरूरत है ।

कब डालोगी, मेरे घर फेरा

तेरे बिन, जी नहीं लगता मेरा,

माँ ! मुझे तेरी जरूरत है ।

कोई न सहारा, बेसहारा अम्बे राणीऐ,

जाऊँगा ना खाली, तेरे द्वार से

तूँ है मेरी माता यह तो, सारा जग जानता है,

बेटा कह दे, तूँ भी कभी प्यार से

हे माँ ! मुझे तेरी जरूरत है ।

मुझे दाती, दुखों ने घेरा

मुझे दाती, दुखों ने घेरा

तेरे बिन, जी नहीं लगता मेरा,

माँ ! मुझे तेरी जरूरत है ।

माँ ! मुझे तेरी जरूरत है ।

तेरे बिना मईया इक्क, पल भी ना गुजरे,

बोल कैसे, जिंदगी गुजारूँ मैं

हर पल याद, सताए तेरी अम्बिके,

हर पल तुझको, पुकारूँ मैं

हे माँ ! मुझे तेरी जरूरत है ।

कब होगा, सुखों का सवेरा

कब होगा, सुखों का सवेरा

तेरे बिन, जी नहीं लगता मेरा,

माँ ! मुझे तेरी जरूरत है ।

माँ ! मुझे तेरी जरूरत है ।

कोई भी सवाली तेरे, दर पे जो आया,

कभी खाली ना, लौटाया महारानीए

रखो मेरी लाज, कभी रहूँ ना मोहताज़,

तेरा युगों तक, राज रहे राणीऐ

हे माँ ! मुझे तेरी जरूरत है ।

मेरे दिल में, करो बसेरा

मेरे दिल में, करो बसेरा

तेरे बिन, जी नहीं लगता मेरा,

माँ ! मुझे तेरी जरूरत है ।

माँ ! मुझे तेरी जरूरत है ।

झण्डेवाली मईया जो भी, झुका तेरे चरणों में,

झण्डे झूले, उसके आसमान में

तेरा जो दीवाना जग, उसका दीवाना मिले,

मान उसे, सारे ही जहान में

हे माँ ! मुझे तेरी जरूरत है ।

मैं चंचल, बाल हूँ तेरा

मैं चंचल, बाल हूँ तेरा

तेरे बिन, जी नहीं लगता मेरा,

माँ ! मुझे तेरी जरूरत है ।

माँ ! मुझे तेरी जरूरत है ।

माँ ! मुझे तेरी जरूरत है ।

कब डालोगी, मेरे घर फेरा

तेरे बिन, जी नहीं लगता मेरा,

माँ ! मुझे तेरी जरूरत है ।

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।